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बोर्ड पर अध्याय नहीं, अध्यापक की शिकायत रटवाते हैं गुरूजी

जयपुर। विद्या का मंदिर यानी विद्यालय ही दूषित हो जाए तो माता-पिता अपने बच्चों को पढऩे कहां भेजें? यदि अध्यापक ही बच्चों को नकारात्मक चीजें सिखाने लगें तो पेरेंट्स का आक्रोश फूटना लाजिमी है। ये दास्तान है मानसरोवर स्थित रा. उच्च प्राथमिक विद्यालय मानसरोवर ओल्ड की। आरोप है कि यहां प्रधानाध्यापक अपने साथ इसी स्कूल के कुछ अध्यापकों को मिलाकर विद्या के मंदिर को दूषित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। प्रधानाध्यापक रामलाल गरुआ, पीटीआई महेश, बसंत जिंदल, भागचंद और शंकरलाल मीणा को लेकर स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के माता पिता ने प्रेस वार्ता की, सांसद, पार्षद, डीओ समेत हर वो दरवाजा खटखटाया जहां से मदद की उम्मीद लगी। लेकिन शिक्षा मंत्री ने भी मदद नहीं की।

यह है कहानी अध्यापक की जुबानी
जमीनी विवाद को लेकर प्रधानाध्यापक रामलाल गरुआ ने हाल ही में पदस्थापित हुए प्रीतम शर्मा को परेशान करना शुरू कर दिया। ऐसे में 52 वर्षीय प्रीतम शर्मा ने अपनी आपबीती महानगर संवाददाता को सुनाई। जमीनी विवाद को प्रधानाध्यापक ने सार्वजनिक करते हुए छोटी-छोटी बच्चियों को मोहरा बनाना शुरू किया। गरुआ ने कुछ अध्यापक और अध्यापिकाओं को साथ मिलाकर मेरे खिलाफ बच्चों से शिकायतें करवानी शुरू कर दी।
शिक्षक प्रीतम ने बताया कि ये शिकायतें बच्चों को रटवाई जाती थी ताकि पूछताछ होने पर बच्चे वही जवाब दें जो गरुआ चाहते थे। लेकिन बच्चों ने यह बात अपने माता पिता को बताई तो वे भड़क उठे और सांसद रामचरण बोहरा, पार्षद कुसुम गोयल के पास पहुंचे उन्होंने प्रधानाध्यापक को हटाने की मांग रखी। लेकिन डीओ की मिलीभगत के कारण यह मांग बीच में ही अटक गई। ऐसे में अध्यापक प्रीतम शर्मा के साथ सभी अभिभावकों ने मिलकर कई दरवाजे खटखटाए।

ये देते हैं सीख
अभिभावकों ने बताया कि हमारी बच्चियों को रामलाल गरुआ अपनी निजी लड़ाई में घसीट रहा है। अध्यापकों से कह कर बच्चियों को प्रीतम सर के बारे में गलत हरकतें करने को लेकर बयान दिलवाए जाते हैं। लेकिन बच्चियों ने हमें घर पर आकर जब ये सारी बातें बताई तो अब हमें उन्हें स्कूल भेजने में भी डर लग रहा है। जबकि प्रीतम शर्मा ऐसी कोई गलत हरकत नहीं करते हैं।

जागो मंत्री जी न्याय करो
सरकारी विद्यालयों को लेकर वैसे ही समाज में एक भय व्याप्त है और ऐसी घटनाएं हमारे शिक्षा के मंदिर का नाम धूमिल करती हैं। यह वाकिया शिक्षा मंत्री तक भी पहुंचाया जा चुका है लेकिन ऐसी शर्मनाक हरकतें करने वालों को पुलिस या मंत्री जी का भय भी नजर नहीं आता।

बच्चों ने चलाई हस्ताक्षर मुहीम
अध्यापक ही बच्चों का भविष्य तय करता है। ऐसे में अपने गुरु प्रीतम शर्मा को मुसीबत में देख नन्हे मुन्नो ने अपने शिक्षक को बचाने के लिए मुहीम भी चलाई बच्चों ने लिखकर और हस्ताक्षर कर अपना रोष जताया और सफाई दी। खबर के सारे साक्ष्य और कागजात महानगर के पास मौजूद हैं। स्कूली टीचर और अभिभावकों ने ऐसे तत्वों से परेशान होकर शपथपत्र देकर ‘महानगरÓ कार्यालय पहुंचकर अपना दर्द बयां किया। सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए जयपुर महानगर टाइम्स तत्परता से इस खबर का अगला भाग जल्दी ही लिखेगा।

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