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ट्रेक से उतरी साइकिल योजना

जयपुर। राजधानी को प्रदूषणमुक्त करने और परकोटा क्षेत्र में बढ़ते वाहनों का दबाव कम करने के लिए बनाई गई ‘साइकिल योजना (पब्लिक बाइसाइकिल स्कीम) साकार नहीं हो पाई है। चारदीवारी में करोड़ों रुपए खर्च कर साइकिल ट्रैक बनाने की कवायद अधूरी ही रह गई है।

हालांकि स्मार्ट सिटी योजना के तहत जरूर शहर में सैलानियों एवं स्थानीय नागरिकों को साइकिल उपलब्ध करवाकर शहर को प्रदूषण मुक्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन पूर्व में शुरू की जाने वाली साइकिल योजना ठंडे बस्ते में चली गई है। गौरतलब है कि जयपुर में बढ़ते वाहनों के चलते वायु एवं ध्वनि प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है।

क्या था प्रोजेक्ट

योजना के अनुसार परकोटा क्षेत्र में हर 300 से 400 मीटर दूर पर साइकिल स्टैंड बनाए जाने थे। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत 1000 साइकिलों से होनी थी। इसके लिए 76 साइकिल स्टैंड बनाए जाने थे।

साइकिल किराए पर लेने के लिए शुरुआती 30 मिनट के लिए कोई शुल्क देय नहीं किया जाना निर्धारित किया गया था। इस संबंध में किए गए सर्वे में उजागर हुआ था कि साइकिल का उपयोग शुरू होने पर चारदीवारी में वाहनों की संख्या में कमी आएगी। जिससे यहां ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

योजना पर संशय कायम
योजना पर सवालिया निशान भी उठने शुरू हो गए हैं। इसके पीछे अहम कारण यह है कि जेडीए ने इससे पहले सीकर रोड पर भी अलग से साइकिल ट्रैक बनाया, लेकिन इस पर कभी साइकिल दौड़ी ही नहीं।

इसके बाद जेडीए ने भवानी सिंह रोड को मॉडल रोड बनाया और इस पर भी साइकिल ट्रैक बनाया गया, लेकिन यह ट्रैक पार्किंग के काम आ रहा है। इस योजना में जेडीए की ओर से सांगानेरी गेट से गोविंददेव जी मंदिर तक सड़क के दोनों तरफ 2.5 मीटर में साइकिल ट्रैक बनाया जाना था। चारदीवारी में बेतरतीब पार्किंग के कारण पहले से ही यहां वाहनों के चलने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। ऐसे में पहले से सिकुड़ी हुई सड़क का करीब सात फीट हिस्सा इस ट्रैक में उपयोग किया जाना मुश्किल नजर आया।

प्रदूषण नियंत्रण में कारगर साबित होगा साइकिल का चलन
राजधानी जयपुर में पिछले पांच सालों में यहां प्रतिवर्ष सड़क पर उतरने वाली गाडिय़ों की संख्या में हर साल 11 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हो रहा है। गाडिय़ों के नए पंजीयन के मामले में जयपुर देश के पहले पांच शहरों में आ चुका है।
प्रति 1000 व्यक्तियों पर कारों की संख्या का आंकड़ा जयपुर में दिल्ली से भी ज्यादा हो चला है।

वर्तमान में जयपुर में 15 लाख से ज्यादा दुपहिया वाहन, 25 हजार ऑटोरिक्शा, 3 लाख से ज्यादा कार, टैक्सी और जीप तथा 350 लो-फ्लोर बसें और 3 हजार सिटी मिनी बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं और विशेषकर कारों और दुपहिया वाहनों की संख्या में प्रतिदिन बेतहाशा बढ़ोत्तरी होती जा रही है।

ऐसे में राजधानी की सड़कें संकरी हो चली हैं। विशेष तौर पर चारदीवारी क्षेत्र में तो अब ट्रैफिक रेंग-रेंग कर चलने लगा है। ऐसे में ट्रैफिक की समस्या से निजात एवं प्रदूषण दोनों से बचने के लिए साइकिल का प्रयोग कारगर साबित माना जा रहा है।

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