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चिकित्सकों-सरकार के अडिय़ल रवैया से बदहाल प्रदेश,वार्ता फिर विफल

जयपुर। राजस्थान चिकित्सक संघ की प्रदेश व्यापी हड़ताल पर सूबे की सरकार ने नरम रुख अपनाते हुए वार्ता के लिए बुलाया था, लेकिन सरकार और चिकित्सक संघ के बीच बात नहीं बन पाई और वार्ता विफल हो गई। सूत्रों के अनुसार वित्त विभाग से जुड़े मसले पर निस्तारण, क्रियान्वयन और पालना जैसे शब्दों के उपयोग पर सहमति नहीं बनने से वार्ता देर रात फिर विफल हो गई। दूसरी ओर अब इसे लेकर राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने अपनी गंभीरता दिखाते प्रसंज्ञान लिया है। सेवारत चिकित्सकों के सामूहिक इस्तीफे और हड़ताल को लेकर आयोग प्रदेश के प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा, प्रमुख सचिव चिकित्सा विभाग को नोटिस दे कर हड़ताल का कारण और इस दौरान मरीजों के इलाज के लिए जो व्यवस्थाएं की गई हैं, उसके बारे विस्तार से बताने को कहा है।

जिला कलेक्ट्रेट में कंट्रोल रूम स्थापित
जिले में सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के मध्यनजर जिला कलेक्ट्रेट के कमरा नं. 17 में कंट्रोल रूम स्थापित किया है। जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट सिद्धार्थ महाजन ने कंट्रोल रूम के राउंड द क्लाक संचालन के लिए तीन अलग-अलग पारियों में प्रात: 8 बजे से दोपहर 4 बजे, दोपहर 4 बजे से रात्रि 12 बजे और रात्रि 12 बजे से सुबह 8 बजे तक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। प्रत्येक पारी के प्रभारी अधिकारियों को अपनी पारी में कंट्रोल रूम संचालन से संबंधित रिपोर्ट उसी दिन अतिरिक्त जिला कलेक्टर (चतुर्थ) को भिजवाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हंै। कंट्रोल रूम के दूरभाष नं. 0141-5165235, 0141-5165265, 0141-2204475 है।

सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था चरमराई
राजस्थान में अपनी 33 मांगों को लेकर सामूहिक अवकाश पर गए सरकारी डॉक्टर मंगलवार को भी काम पर नहीं लौटे। डॉक्टरों की अनुपस्थिति में सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। सरकार की ओर से अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों के लिए किए गए वैकल्पिक इंतजाम भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। प्रदेश कि सेवारत डॉक्टरों की 33 मांगें प्रदेश के 33 जिलों पर भारी पड़ रही हैं। डॉक्टरों की गैरहाजिरी के चलते मंगलवार को अलवर जेल के एक बंदी और भरतपुर के कामां में एक महिला श्रद्धालु की मौत हो गई। इसी तरह सोमवार को बांसवाड़ा की गर्भवती दुर्गा का गर्भस्थ बच्चा और भीलवाड़ा के शाहपुरा में 56 साल के माधू इलाज नहीं मिलने से नहीं बचाए जा सके। अस्पतालों में उपचाराधीन गंभीर रोगियों की हालत नाजुक बनी हुई है। सेवारत डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश या हड़ताल पर चले जाने से प्रदेशभर के करीब 2800 अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सा सेवाएं गड़बड़ा गई है. बड़े अस्पतालों में गंभीर ऑपरेशन टाले जा रहे हैं वहीं आउटडोर भी आयुष चिकित्सकों के भरोसे चल रही हैं.
सरकारी पर्ची पर प्राइवेट अस्पताल में इलाज
सरकार ने डॉक्टर के सामूहिक अवकाश के बाद वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए सभी जगह आयुष चिकित्सकों को ड्यूटी पर लगाया है. वहीं सरकारी अस्पताल के आउटडोर में पहुंचने वाले मरीजों को अस्पताल की पर्ची से प्राइवेट अस्पतालों में चेकअप की व्यवस्था भी कराई गई है.

स्ट्राइक के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका पेश, 9 को सुनवाई
राजस्थान हाईकोर्ट में चिकित्सकों की हड़ताल को लेकर अवमानना याचिका पेश की गई है। जिस पर अदालत 9 नवम्बर को सुनवाई करेगी। गोविंद कुमार की ओर से पेश अवमानना याचिका में चिकित्सा सचिव वीनू गुप्ता, डॉ. अजय चौधरी और डॉ. दुर्गाशंकर सैनी को पक्षकार बनाया गया है। अवमानना याचिका में कहा गया कि सितम्बर 2012 में हाईकोर्ट ने डॉ. अजय चौधरी के नेतृत्व में 2011 में हुई हड़ताल को असंवैधानिक मानते हुए कहा था कि चिकित्सक हड़ताल नहीं कर सकते।

 

 

इसके अलावा चिकित्सक अपना पंजीकरण कराने से पहले लिखित में शपथ देते हैं कि वे मानवता की सेवा करेंगे, जबकि हडताल कर वे मानवता के साथ छल कर रहे हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि सरकार ने रेस्मा लागू किया, लेकिन कभी दोषियों को सजा नहीं दी गई। इसके विपरीत समझौते कर मुकदमें वापस लिए गए। याचिका में कहा गया कि हडताली चिकित्सकों को चिन्ह्ति कर उनकी मेडिकल डिग्री को रद्द की जानी चाहिए।

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