आरओ वॉटर से होगा महाकाल का अभिषेक : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। उज्जैन स्थित महाकाल ज्योतिर्लिंग के क्षरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सकारात्मक टिप्पणी करने के साथ ही कुछ निर्देश भी दिए है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मंदिर प्रबंधन क्षरण रोकने के लिए जो उपाय कर रहा है वो संतोषजनक है। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक को लेकर निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई अब 30 नवंबर को होगी।

गौरतलब है कि महाकाल शिवलिंग के क्षरण को लेकर दायर याचिका पर लगातार कवायद चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पिछले दिनों पुरातत्व विभाग, भूवैज्ञानिकों और अन्य विशेषज्ञों की टीम ने महाकाल का दौरा कर शिवलिंग, पानी, फूल, दूध सहित तमाम पहलूओं की जानकारी जुटाई थी। इस टीम ने कोर्ट को बताया था कि पूजा के दौरान महाकाल को चढ़ाई जा रही कुछ चीज़ों से शिवलिंग को नुकसान हो रहा है जिनमें कुंड का पानी भी शामिल है।

आरओ वॉटर से होगा अभिषेक

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए कि अब से महाकाल ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक केवल आरओ वॉटर से ही होगा। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने पानी की मात्रा भी तय कर दी है। अब से भक्त केवल आधा लीटर पानी ही अपने साथ ले जा सकेंगे।

इसके अलावा दुग्धाभिषेक के लिए भी सुप्रीम कोर्ट ने 1.25 लीटर की मात्रा तय कर दी है। इससे ज्यादा दूध से अभिषेक नहीं हो सकेगा।

सामाजिक कार्यकर्ता ने दायर की थी याचिका

महाकाल मंदिर में करोड़ों भक्त पहुंचते हैं। शिवलिंग पर लगातार जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और फलों के रस से अभिषेक सहित कई तरह के अभिषेक होते हैं। इसके लिए बड़ी मात्रा में छोटी-बड़ी फूल मालाएं, हार, धतूरे चढ़ते हैं। ऐसे में शिवलिंग के क्षरण की बात सामने आई। शिवलिंग को नुकसान से बचाने के लिए उज्जैन की सामाजिक कार्यकर्ता सारिका गुरु ने भक्तों को गर्भ गृह में प्रवेश और शिवलिंग को स्पर्श करने पर आपत्ति जताते हुए याचिका दायर की थी। सारिका ने याचिका में ओंकारेश्वर, मल्लिकार्जुन, सोमनाथ जैसे कई ज्योतिर्लिंगों का जिक्र भी किया जहां भक्तों को गर्भ गृह में जाने पर रोक है।

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