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नोटबंदी से डिजिटल लेनदेन बढ़ा और यह मुद्दा विमर्श के केंद्र में आया: जेटली

नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘अगली बैठक में जीएसटी परिषद की समस्या पर कम से कम चर्चा तो करेंगे ही। कुछ राज्य इसे रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाना चाहते हैं और कुछ नहीं। यह दो मत हैं और चर्चा करने के बाद हमारी कोशिश होगी कि एक मत पर सहमति बनाई जाए।’

जेटली ने कहा कि इसका लाभ उपभोक्ताओं को होगा जिन्हें पूरे उत्पाद पर केवल ‘अंतिम कर’ देना होगा और जीएसटी के तहत यह अंतिम कर लगभग नगण्य होगा। कर दायरे के तहत लोगों को लाने के लिए दी जाने वाली छूट और अंतिम व्यय में कमी किए जाने से कालेधन से चलने वाली ‘छद्म अर्थव्यवस्था’ का आकार घटाने में भी मदद होगी। किसी परिसर, इमारत और सामुदायिक ढांचे के निर्माण पर या किसी एक खरीदार को इसे पूरा या हिस्से में बेचने पर 12% जीएसटी लगाया गया है। हालांकि भूमि एवं अन्य अचल संपत्तियों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।

नोटबंदी एक ‘बुनियादी सुधार’ है
नोटबंदी पर जेटली ने कहा कि यह एक ‘बुनियादी सुधार’ है जो भारत को एक और अधिक कर चुकाने वाले समाज के तौर पर बदलने के लिए जरुरी था। ‘‘यदि आप इसके दीर्घकालिक प्रभाव को देखें तो नोटबंदी से डिजिटल लेनदेन बढ़ा और यह मुद्दा विमर्श के केंद्र में आया। इसने व्यक्तिगत कर आधार को बढ़ाया है। इसने नकद मुद्रा को तीन प्रतिशत तक कम किया जो बाजार में चलन में थी।’’ जेटली ने कहा, ‘‘जिन कदमों के दीर्घावधि लक्ष्य होते हैं, इस बात में कोई शक नहीं कि उसमें लघु अवधि की चुनौतियां होंगी ही, लेकिन यह भारत को एक गैर-कर चुकाने वाले देश से अधिक कर अनुपालक समाज बनाने के लिए आवश्यक था।’’

 

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