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 मूंछ रखने पर दलित की पिटाई पर रवीश कुमार ने पूछा- सरकार ने नौकरी नहीं दी तो दलि‍तों पर क्यों निकाल रहे हो गुस्सा?

गुजरात। मंगलवार (तीन अक्टूबर) को एक 17 वर्षीय किशोर को दो अज्ञात मोटरसाइकिल सवारों ने कथित तौर पर मूँछ रखने की वजह से ब्लेड मारकर घायल कर दिया। बीते एक हफ्ते में कथित तौर पर मूँछ रखने को लेकर दलित युवकों की सवर्णों द्वारा पिटाई का यह तीसरा मामला है।

इसी हफ्ते गुजरात मे ही एक दलित युवक को कथित तौर पर सवर्णों ने इसलिए पीट कर मार डाला क्योंकि वो एक मंदिर में हो रहा गरबा देख रहा था। इंडियन एक्सप्रेस द्वारा बुधवार को तीसरी घटना के प्रकाशित होने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अपना क्षोभ जाहिर किया। वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने घटना पर कमेंट करते हुए दलितों के खिलाफ गुस्से के पीछे बढ़ती बेरोजगारी को एक वजह बतायी है। नीचे रवीश कुमार की पूरी पोस्ट दी जा रही जिसे आप पढ़ सकते हैं।

रवीश कुमार की फेसबुक पोस्ट- मूँछ रखने के कारण क्या किसी को पीटा जा सकता है? गरबा देखने के लिए क्या किसी को इतना मारा जा सकता है कि वह मर जाए? क्या इसके पीछे किसी जाति के प्रति घिन है? फिर वो कौन सी चीज़ है जिसके कारण बारात निकलने या गरबा देखने पर किसी दलित की हत्या कर दी जाती है? झगड़े और हत्या के कई कारण हो सकते हैं लेकिन क्या यह हमारे समाज की क्रूरतम सच्चाई आज भी मौजूद नहीं है? अगर हम समाज के भीतर बैठे इस घिन के बारे में सोच लेंगे तो क्या बहुत बुरा हो जाएगा? समाज में काफी हद तक अश्पृश्यता तो समाप्त हुई है लेकिन उसके बचे रहने का प्रतिशत भी कम नहीं है।

अश्पृश्यता का यह नया रूप है घिन। ये घिन ही है जो किसी को किसी की निगाह में कमतर बनाती है और उसके प्रति समाज का व्यवहार बदल देती है।
क्या इस हिंसा में शामिल और उसके साथ खड़े लोगों को बेहतर होने में समस्या है? वो क्यों चुप रहते हैं? क्या गुजरात में किसी चीज़ की कमी रह गई है,जहाँ मूँछ के कारण लड़के पीटे जा रहे हैं? सरकार ने नौकरियाँ नहीं दीं तो ख़ाली बैठकर उसका गुस्सा दलित युवकों पर क्यों निकाल रहे हो भाई। सरकार तो तुम्हें दस बारह हज़ार के ठेके पर काम देने से ज़्यादा क़ाबिल नहीं समझती है और आप हैं कि इसका खुंदक दलितों पर निकाल रहे हैं? आप जान गए होंगे कि यहाँ आप से मतलब कौन है।

गांधीनगर गाँव के अज्ञात युवाओं के मन में क्या उबल होगा जिसके कारण एक 17 साल के दलित युवक को इसलिए चाक़ू मार देते हैं कि उसने मूँछे रखी हैं। इस गाँव में पहले भी दो युवाओं पर उच्च जाति के लोगों ने इसलिए हमला कर दिया क्योंकि उनकी मूँछें थीं। मूँछ रखने पर हमले के आरोप में FIR दर्ज हो रही है। क्या यह सामूहिक शोक और शर्म का विषय नहीं है?

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