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वार्ड 49 में दलगत राजनीति में अटका बीसलपुर का नीर

जयपुर। (योगेश शर्मा) बगरू विधानसभा के वार्ड 49 में सबसे बड़ी समस्या पेयजल है। दलगत राजनीति के कारण यहां के वाशिंदों को बीसलपुर का नीर नसीब नहीं हो पा रहा है। हालांकि जेडीए अप्रूव्ड कॉलोनियों में जलदाय विभाग ने करीब 2 साल पहले पानी की लाइनें डाल दी हैं लेकिन नेताओं की बेरुखी और जलदाय विभाग के अधिकारियों की अकर्मण्यता के कारण इन लाइनों में पानी शुरू नहीं हो पाया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जगतपुरा, इंदिरा गांधी नगर, सेक्टर एक से छह, तिलक विहार, खातीपुरा, कुंदनपुरा, रोपाड़ा, गिलहरिया, मीणों की ढाणी, खातियों की ढाणी, बागड़ों की ढाणी, खो-नागौरियान, करीम कॉलोनी, मदीना नगर, सईना विहार, करीम कॉलोनी से आगरा रोड तक विस्तृत तकरीबन 8 से 10 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले इस वार्ड में स्थानीय निवासियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए वर्षों से प्रशासन का मुंह ताकना पड़ रहा है। जबकि नगर निगम, जेडीए और आवासन मंडल के अधीन आने वाले इस वार्ड में 475 कॉलोनियां, 11 गांव और 17 ढाणियां हैं। इनमें मुख्य समस्या पेयजल को लेकर बनी हुई है। स्थिति यह है कि लोगों को बूंद-बूद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। जबकि वार्ड में अधिकतर कॉलोनियों में पानी की टंकियां और पाइप लाइनें करीब दो साल पूर्व डाली गई। इन पाइप लाइनों के जरिए योजना के अनुसार पूरे वार्ड में नियमित हो चुकी कॉलोनियों में गुरु कॉलोनी,लक्ष्मी नगर, किशन कॉलोनी, बाल नगर, बाबा नाहर सिंह कॉलोनी, गणपति नगर सहित 30 से 40 कॉलोनियों आदि में बीसलपुर का पानी उपलब्ध करवाना था। लेकिन यहां काफी समय से दलगत राजनीति के चलते न तो इन टंकियों में पानी भरा गया और न ही इनका अभी तक उद्घाटन हुआ है। ऐसी स्थिति में लोगों को मानो बीसलपुर का पानी मिलना एक सपना बनकर रह गया है। हालांकि सरकार ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 68 करोड़ 69 लाख रुपए खर्च किए जो पूरी तरह से दलगत राजनीति का शिकार होने लगे हैं। लोगों को पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए स्थानीय नागरिकों की ओर से आंदोलन ही नहीं वरन् इस प्रोजेक्ट को शुरू किए जाने की मांग को लेकर पार्षद, स्थानीय विधायक, जलदाय विभाग के अधिकारियों के अलावा मंत्रियों तक गुहार लगाने के बावजूद लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

 

वार्ड में पूर्व में लोगों की पेयजल समस्या के समाधान के लिए जगह-जगह प्लास्टिक की टंकियां रखी गईं जिनमें न तो जलदाय विभाग की ओर से पानी भरा जाता है और न ही इनके आस-पास कोई बोरिंग है। ऐसी स्थिति स्थानीय महिलाओं को दो से चार किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता है। यों तो वार्ड में जलदाय विभाग की ओर से कई जगह पानी के नल लगे हुए हैं लेकिन इनमें एक ही समय पानी आता है वह भी कभी 15 मिनट तो कभी आधा घंटा। ऐसी स्थिति में लोगों को दैनिक जरूरत के लायक भी पानी नहीं मिल पाता है।

खाली प्लाट बने जी का जंजाल
वार्ड में इंदिरा नगर सेक्टर एक से लेकर 6 तक करीब एक हजार से अधिक प्लाट या तो खाली हैं या फिर जो प्लाट बने हुए हैं उनमें भी 70 फीसदी में किसी तरह की रहवास नहीं है। जिन प्लाटों में लोग रहते हैं उनमें सिर्फ 30 फीसदी किराएदार ही निवास कर रहे हैं। इन किराएदारों का न तो पुलिस वैरीफिकेशन है और ही कोई किरायानामा। वर्षों से खाली पड़े प्लाट या तो कचरा डिपो बन चुके हैं या फिर उनमें खरपतवार उग आया है जिससे लोगों को जहरीले जानवरों का खतरा बना हुआ है।

पार्षद की बेरुखी-निगम की उदासीनता
कहने को तो नगर निगम की ओर से शहर के अधिकतर वार्डों में कचरा निस्तारण के लिए हूपर लगा रखी हैं लेकिन इस वार्ड में किसी तरह की सुविधा नहीं मिलने के कारण लोगों को असुविधाओं में जीवन यापन करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में अधिकतर जगह सफाई व्यवस्था स्थानीय लोगों के सहारे ही चल रही है मानो यहां के लोगों को सफाई की सुविधा देना नगर निगम की की प्राथमिकता में ही नहीं है! पार्षद की बेरुखी और नगर निगम की उदासीनता से फैल रही गंदगी और असुविधाओं से यहां के नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है। सफाई नहीं होने से सड़कों पर कचरे का ढेर लगा हुआ है।

बदहाल सड़कों से गुजरना दूभर
वार्ड में चाहे नियमित कॉलोनियां हों या फिर अनएप्रूव्ड कॉलोनियां सभी में सड़कें बदहाल हैं। हालांकि सड़क निर्माण के साथ लोगों को माकूल सुविधाएं मिलें इसकी मांग को लेकर स्थानीय निवासियों की ओर से कई बार विधायक, पार्षद और मंत्रियों तक सुविधाएं मुहैया करवाने की मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जब भी लोग जनप्रतिनिधि से समस्याओं को लेकर मिलने जाते हैं तो सिर्फ एक ही जवाब मिलता है कि प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन हकीकत में असुविधाओं को देखते हुए अब तक यहां किसी तरह के विकास ही न हुए हों। सड़कों की बदहाली का आलम यह है कि वाहन हिचकोले खाते हुए चलते हैं।

छह साल से बोरिंग खराब
इंदिरा गांधी नगर के पास स्थित कुंदनपुरा गांव में छह साल पूर्व जलदाय विभाग की ओर से बोरिंग लगाया गया था जो पिछले तीन साल से खराब पड़ा है। यहां रखी प्लास्टिक टंकी भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। कभी-कभार जलदाय विभाग की ओर से टैंकर आता है लेकिन टंकी क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों को टैंकर से ही पानी लेना पड़ता है। पेयजल समस्या के निवारण के लिए लोगों को यहां तो निजी खर्चे पर टैंकर मंगवाने पड़ते हैं या फिर निजी बोरिंगों पर निर्भर रहना पड़ता है।

सफाई अभियान को नहीं मिला बल
नगर निगम ने परिसीमन के दौरान ग्रामीण क्षेत्र, शहरी शहरी क्षेत्र और आस-पाास की ढाणियों को जोड़कर यह वार्ड बनाया गया। लेकिन निगम क्षेत्राधिकार में सबसे बड़ा वार्ड होने के बावजूद न तो यहां निगम की ओर से अब तक स्वच्छता अभियान शुरू किया गया और न ही लोगों को किसी तरह की सुविधाएं मिल रही हंै। जिस वार्ड में सुविधाएं मिलनी चाहिए उस वार्ड को निगम की ओर से मानो लावारिस ही छोड़ दिया हो। स्थिति यह है कि सड़क के किनारे और कॉलोनियों के मुख्य द्वार पर कचरा-गंदगी के ढेर मिल जाएंगे।

उनके पास ही लोग कचरा डालते हैं।
ड्रेनेज और सीवर सिस्टम सिर्फ कागजों में
जेडीए से नियमित कॉलोनियों में ड्रेनेज और सीवरेज जैसी सुविधाएं नहीं मिलने तथा घरों का पानी मुख्य रास्तों में बहने लगता है जिसकी वजह से कच्ची सड़कों में गहरे गड्ढे हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जेडीए ने नियमितिकरण के वक्त सीवरेज चार्ज जोड़कर कॉलोनियों को अप्रूवड किया था लेकिन 10 से अधिक साल बीत जाने के बावजूद हालात नहीं सुधरने से अब तक यहां रहने वाले लोगों को ऐसा लगने लगा है कि मानो नारकीय जीवन जीना ही उनकी मजबूरी है।

 

इनका कहना है…
निगम क्षेत्र में आने वाले इस वार्ड में मुख्य समस्याएं विकास कार्यों को लेकर हैं। टंकी निर्माण होने तथा पेयजल लाइनें सिर्फ एप्रूब्ड कॉलोनियों को ही बीसलपुर का पानी उपलब्ध करवाने के लिए डाली गई हैं जबकि सरकार को चाहिए कि वह ऐसी स्थिति में सबसे पहले पेयजल समस्या का समाधान करे। निगम की उदासीनता के चलते वार्ड के निवासियों को किसी तरह की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। सुविधाएं मिलें इसको लेकर प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन बजट पास नहीं होने से विकास कार्य पूर्णत: रुके हुए हैं। स्थिति यह है कि यहां सफाई व्यवस्था तक बदहाल बनी हुई है।
-मोहनलाल मीना, पार्षद, वार्ड-49

बगरू विधानसभा के इस वार्ड में लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। स्थानीय निवासी सुविधाओं की मांग को लेकर नगर निगम, जेडीए, आवासन मंडल और विधायक तक का दरवाजा खटखटा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। वार्ड में तकरीबन 40 कॉलोनियों को बीसलपुर पानी के लिए जलदाय विभाग की ओर से 68.69 करोड़ रुपए की लागत से पानी की टंकियां और पाइप लाइनें डाली जा चुकी हैं लेकिन वह भी दलगत राजनीति के चलते शुरू नहीं हो रही है।
-रामावतार अग्रवाल,
अध्यक्ष, जयपुर ईस्ट डवलपमेंट सोसायटी

गांव को बसे हुए करीब 70 साल हो चुके हैं लेकिन अब तक सड़क निर्माण ही पूरा नहीं हुआ है। दूसरी ओर रोड लाइटें नहीं होने के कारण वाहन चलाना भी खतरे की घंटी बनी हुई है। जब भी पार्षद और विधायक से मिलते हैं तो सिर्फ आश्वासन ही मिले लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। चुनाव के दौरान लम्बे-चौड़े दावे करने वाले पार्षद और स्थानीय विधायक तक यहां एक भी बार लोगों के हालचाल पूछने नहीं आए। अधिकतर गांव और ढाणियों को जाने वाले रोड तो बने हुए हैं लेकिन सड़कें इतनी क्षतिग्रस्त हैं कि इन पर वाहन चलाना दूभर होने लगा है।
-सूरजमल सोनवाल, निवासी, कुंदनपुरा

कॉलोनियों का नियमितीकरण नहीं होने से अधिकतर कॉलोनियों में सड़क, नालियां, सीवरेज, पेयजल जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। जबकि इन कॉलोनियों में पूरी तरह से बसावट हो चुकी है लेकिन जेडीए अधिकारियों ओर स्थानीय पार्षद की मिलीभगत के चलते अब तक कॉलोनियों को नियमितीकरण के लिए किसी तरह का शिविर नहीं लगाया गया है। जिससे लोगों को किसी तरह की राहत नहीं मिल पाती। हालांकि कई बार इस संबंध में स्थानीय निवासियों की ओर से जेडीए अधिकारियों को ज्ञापन दिए गए लेकिन सिर्फ आश्वासन के अलावा कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
-राहुल कुमार, निवासी सेक्टर 3

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