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भारतीय वायु सेना के मार्शल अर्जन सिंह को राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

नई दिल्ली। वायुसेना के एकमात्र मार्शल अर्जन सिंह को सोमवार सुबह पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनका अंतिम संस्कार ब्रार स्क्वेयर पर किया गया। इसके पहले श्रद्धांजलि दी गई जिसके लिए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा लालकृष्ण आडवाणी और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के अलावा कई लोग मौजूद थे। अर्जन सिंह के सम्मान में सोमवार को यहां सभी सरकारी इमारतों में राष्ट्रध्वज आधा झुका दिया गया।

देश के एकमात्र वायुसेना मार्शल अर्जन सिंह को अंतिम विदाई देने से पहले उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई साथी है वायुसेना के फायटर जेट और हेलीकॉप्टर्स ने ब्रार स्क्वेयर के ऊपर से उड़ान भरी।

इससे पहले रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घर जाकर अर्जन सिंह के अंतिम दर्शन किए और उन्हें श्रद्धांजलि दी। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्जन सिंह के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र चढ़ा कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ, नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लाम्बा, थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद थे।

अर्जन सिंह को श्रद्धांजलि देने वालों में वित्त मंत्री अरुण जेटली, केंद्रीय मंत्री और पूर्व थलसेना प्रमुख वीके सिंह, पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी और कांग्रेस सांसद कर्ण सिंह में शामिल हैं। रक्षा मंत्री सीतारमण ने बताया कि अर्जन सिंह का अंतिम संस्कार सोमवार सुबह साढ़े नौ बजे बरार स्क्वायर में किया जाएगा। शवयात्रा सुबह साढ़े आठ बजे उनके निवास सात-ए, कौटिल्य मार्ग से शुरू होगी। अगर मौसम ठीक रहा तो उनके सम्मान में फ्लाई पास्ट का भी आयोजन किया जाएगा।

उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने अपने शोक संदेश में अर्जन सिंह को भारतीय नौसेना का ‘आइकन’ बताया और 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उनके योगदान का याद किया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अर्जन सिंह के निधन पर शोक जताया और उन्हें उत्कृष्ट सैनिक और राजनयिक बताया।

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि उनके निधन से सेना ने अगुआ और नेतृत्व करने वाली रोशनी को खो दिया है।

मार्शल अर्जन सिंह का शनिवार को सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में निधन हो गया था। वह 98 साल के थे। वह वायुसेना एकमात्र अधिकारी थे जिन्हें फाइव स्टार रैंक दिया गया था। उन्हें 44 वर्ष की आयु में ही भारतीय वायुसेना का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई जिसे उन्होंने शानदार तरीके से निभाया।

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