Breaking News

स्वच्छ भारत का यह केसा इरादा, निगम ने दुकानों में कचरा पात्र रखवाए और खुद के हटा लिए

जयपुर। (महेन्द्र भौमियां) पिछले दिनों नगर निगम प्रशासन ने अभियान चलाकर घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में कचरा पात्र रखने की अपील की। अपील-समझाइश के बाद सख्ती बरतते हुए कचरा पात्र नहीं मिलने पर दुकानदारों के चालान काटे गए लेकिन दूसरी ओर नगर निगम ने सड़कों और मुख्य मार्गों से अपने कचरा पात्र हटा लिए। हालांकि निगम की घर-घर से कचरा संग्रहण योजना के बाद शहर की सूरत बदलने लगी है। लोग अपने घर का कचरा गाड़ी में डाल रहे हैं। ज्यादातर व्यापारिक प्रतिष्ठानों ने भी कचरा पात्र रख लिए हैं, वे भी गाड़ी में कचरा डाल रहे हैं, इसके बावजूद कचरा निस्तारण की समस्या का पूरी तरह निस्तारण नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि नगर निगम ने जब से कचरा एकत्र करने का कार्य निजी फर्म बीवीजी को दिया है तब से अपने कचरा पात्र हटा लिए हैं। निगम की ओर से सड़क और मुख्य स्थानों से छोटे और बड़े आकार के कचरा पात्र रखे हुए थे। नगर निगम की गाड़ी इन कचरा पात्रों का कचरा बड़े वाहन में एकत्र कर कचरा डिपो तक पहुंचाती थी। एक वार्ड में एक दर्जन से डेढ़ दर्जन तक छोटे-बड़े कचरा पात्र रखे हुए थे जो कि लगभग सभी हटा लिए गए हैं। शहर के सामुदायिक केन्द्र, विवाह स्थल, मंदिर के बाहर रखे कचरा पात्र हटाने से वहां दिनभर कचरा पड़ा रहता है। यही स्थिति सब्जी मंडियों के बाहर है, यहां भी दिनभर कचरा निकलता है लेकिन कंपनी की गाड़ी एक बार ही आती है। कामकाजी परिवार के सामने भी कचरा निस्तारण की समस्या खड़ी है वे मॉर्निंग वॉक के दौरान कचरे की बाल्टी कचरा पात्र में खाली कर आते थे, लेकिन अब कचरा पात्र ही नदारद है।

यहां मिले कचरे के ढेर
‘महानगर’ के संवाददाता को मुरलीपुरा से झालाना डूंगरी तक यहां-यहां कचरे के ढेर मिले।

  •  मुरलीपुरा सामुदायिक केन्द्र के सामने
  •  मुरलीपुरा सब्जी मंडी
  •  विद्याधरनगर रोडवेज डिपो
  •  ढहर के बालाजी
  •  चौमूं पुलिया, हनुमान मंदिर वाली गली
  • अम्बाबाड़ी रेड लाइट
  •  पानीपेच सरकारी स्कूल
  • बनीपार्क मारुति शोरूम के सामने
  •  बाईजी की कोठी झालाना डूंगरी
  •  कचरा डिपो झालाना डूंगरी

सामुदायिक केन्द्र के बाहर लगा कचरे का ढेर
जयपुर शहर में जेडीए और नगर निगम के कई सामुदायिक केंद्र हैं, जहां आए दिन विभिन्न आयोजन होते हैं। मेहमानों को भोजन कराने के बाद पहले पत्तल-दौने कचरा पात्र में डाल दिए जाते थे। सुबह निगम की गाड़ी कचरा उठा ले जाती थी।

अब कचरा उतना ही निकल रहा है लेकिन कचरा पात्र नहीं होने के कारण पत्तल-दौने सड़क पर डाले जा रहे हैं। सामुदायिक केन्द्र के अलावा मैरिज गार्डन और मंदिरों के बाहर भी यही स्थिति है। यहां भी दिनभर कचरा निकलता है लेकिन उसका निस्तारण करने के लिए कचरापात्र ही नहीं है। मजबूरन कभी जहां कचरा पात्र रखा हुआ था वहीं पर कचरा डाला जा रहा है। मुरलीपुरा स्कीम, विद्याधरनगर के सामुदायिक केन्द्र के बाहर कचरे का ढेर देखा जा सकता है।

वार्ड एक से तीन में संसाधनों का अभाव
नगर निगम प्रशासन ने वार्ड नंबर एक-दो-तीन में अभी तक डोर टू डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था शुरू नहीं की है। वार्ड नंबर दो के निर्दलीय पार्षद किशनलाल अजमेरा ने बताया कि निगम अधिकारी कहते हैं कि अभी टैंडर नहीं हुए हंै। इसका खामियाजा वार्डवासियों को भुगतना पड़ रहा है। विद्याधरनगर विधानसभा के अधिकतर वार्डों में यह व्यवस्था शुरू हो चुकी है फिर भी निगम ने यहां संसाधन उपलब्ध नहीं करवाए। निगम के कर्मचारी, हूपर, जेसीबी सहित सभी सामान निगम ने हटाकर कार्यालयों में जमा कर लिया है। यही स्थिति वार्ड एक और तीन की है। वार्ड नंबर एक का कुछ हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में आने के कारण यहां स्थिति और भी खराब है। नींदड़ गांव वार्ड नंबर एक में आता है। यहां साफ-सफाई की बुरी स्थिति है। वार्ड नंबर तीन में भी सफाई अभियान चौपट है। इन वार्डों की एक समस्या यह भी है कि इनमें कई कॉलोनियां नियमित नहीं हुई है। सड़क सहित विभिन्न सुविधाएं नहीं होने के कारण कंपनी यहां व्यवस्था शुरू करने में हिचक रही है।

अपर्याप्त सिद्ध हो रहे छोटे कचरा पात्र
नगर निगम ने अभी भी वीआईपी कॉलोनियों और मुख्य सड़कों पर छोटे कचरा पात्र रख रखे हैं। विधानसभा, जनपथ, स्टेच्यू सर्किल, जेएलएन मार्ग पर छोटे कचरा पात्र अभी भी रखे हुए हैं।

ये इसलिए रखे हुए हैं ताकि सड़क की सफाई के दौरान एकत्र कचरा इनमें डाल दिया जाए। लेकिन स्थानीय लोग भी इनमें कचरा डाल रहे हैं। ये कचरा पात्र छोटे आकार के हैं। दस-बीस घरों के कचरे से ही ये भर जाते हैं और बाद में कचरा सड़क पर बिखरता रहता है। यदि इन कचरा पात्रों की जगह पुराने बड़े कचरा पात्र रख दिए जाएं तो इस समस्या का समाधान हो सकता है।

डिपो पर लगा डस्टबिन का ढेर
निगम ने कॉलोनियों से कचरा पात्र हटाकार निकट के कचरा डिपो में रखवा दिए हैं। झालाना स्थित नगर निगम के भूखंड की चारदीवारी के पास कचरापात्रों का ढेर लगा हुआ है। झालाना डूंगरी स्थित कचरा डिपो के बाहर भी कचरा पात्र रखे हुए हैं।

गोमाता खा रही जूठन, परवाह नहीं किसी को
इन सामुदायिक केन्द्रों, मैरिज गार्डन, मंदिर, सब्जी मंडी या अन्य स्थान से भारी मात्रा में निकले कचरे में गायें दिनभर मुंह मारती रहती हंै। गोवंश से जुड़े संगठनों के लोगों को भी गायों की चिंता नहीं है। लोग अभी भी प्लास्टिक की थैलियों में कचरा डाल रहे हैं जिन्हें खाकर गायें मौत के मुंह में जा रही हैं। कई परिवार आज भी मॉर्निंग वॉक के दौरान ही कचरे का निस्तारण करते हैं। ये सुबह ही डस्टबिन कचरा पात्र में खाली कर देते थे। लेकिन अब मॉर्निंग वॉक का अधिकांश समय तो कचरा पात्र ढूंढऩे में लग जाता है।

पार्षदों ने जताई पीड़ा, सुविधा बन गई दुविधा:
मेरे वार्ड में कचरा लेने के लिए रोजाना गाड़ी नहीं आ रही है। कभी किसी समय आती है तो कभी दूसरे समय। रोजाना एक दर्जन से अधिक शिकायतें दर्ज हो रही हंै। वार्ड में 20-22 बड़े कचरा पात्र रखे हुए थे जो कि हटा लिए गए हैं। अब लोगों के सामने समस्या खड़ी हो गई है कि कचरा कहां डालें।

 

मंजू शर्मा, पार्षद, वार्ड नं.-7

मेरे वार्ड में तेरह स्थानों पर बड़े डस्टबिन रखे हुए थे। सामुदायिक केन्द्र और सब्जी मंडी से दिनभर कचरा निकलता है। पहले यह कचरा डस्टबिन में डाल दिया जाता था, लेकिन अब लोग सड़क पर ही डाल रहे हैं। महापौर से आग्रह किया गया है कि कचरापात्र वापस रखे जाएं।

 

सुशील शर्मा, पार्षद, वार्ड नं.-4

हम कहां खाली करें डस्टबिन
मेरा घर बड़ी चौपड़ पर है, मेरे पापा गोविंददेवजी मंदिर जाते तब सिरहढ्योढ़ी बाजार में रखे कचरा पात्र में कचरा डालते थे। हमारा घर ऊंचाई पर है। बड़ी चौपड़ पर दिनभर शोर-शराबा होने के कारण कचरा लेने वाली गाड़ी की आवाज ही नहीं आती।
मीनाक्षी शर्मा, बड़ी चौपड़

हम दिनभर कच्चे नारियल बेचते हं, उसका वेस्ट बहुत निकलता है। उसे छोटे डस्टबिन में एकत्र नहीं किया जा सकता। मजबूरन हमें सामने सड़क पर कचरा फैंकना पड़ता है।
गिरधारी वर्मा, पानीपेच

मैं वार्ड नंबर छह में निवास करता हूं। पहले कौशिक स्कूल के पास कचरा पात्र था जो अब हटा लिया गया है। मैं सुबह ही घर से निकल जाता हूूं। घर पर कचरा लेने के लिए गाड़ी आती नहीं हैं।
जितेन्द्र जांगिड़, निवारू रोड

———————————————————————

Related Posts

Leave A Comment