खुलासा: जयपुर रामगंज हिंसा में एक नही, दो की हुई मौत

जयपुर। अब तक तो माना जा रहा था कि राजधानी जयपुर के रामगंज इलाके में हुई हिंसा में केवल एक ही युवक की मौत हुई थी। लेकिन ये सच नही है। जानकर हैरानी होगी कि इस घटना में आदिल की मौत के बाद एक और युवक की मौत हो गई है। ये मौत अभी नही हुई बल्कि 8 सितंबर को ही हो गई थी। हैरानी तो यह भी है कि इस युवक की मौत हो जाने के बाद पुलिस प्रशासन ने इसकी भनक जयपुर और मीडिया में किसी को लगने तक नही दी और बात को दबाए रखा।

जानकारी के अनुसार रामगंज हिंसा में मरने वाले दूसरे युवक का नाम भरत कुमार है जो कि विकलांग है। भरत ई-रिक्शा चलाकर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। भरत ब्रह्मपुरी थाना इलाके के शंकर नगर इलाके रहता था। रामगंज में हुई हिंसा के दौरान ही विकलांग ई-रिक्शा चालक भरत कुमार की भी मौत हो गई थी। किसी शख्स ने भरत के चाचा तोलाराम को फोन के जरिए यह बताया था कि इस घटना में भरत कुमार घायल हो गया, जिसे सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया है। साथ ही ये बताया कि भरत का रिक्शा रामगंज इलाके में खडा हुआ है।

जैसे ही भरत के चाचा को इस बात की जानकारी मिली तो वह घबराकर दौड़े-दौड़े पहले तो रामगंज इलाके में आए। तोलाराम को इस दौरान भरत का रिक्शा तो मिल गया, लेकिन भरत नही मिला। इस पर तोलाराम सवाई मानसिंह अस्पताल पहुंचा, लेकिन उन्हें यहां भी भरत का कोई अता-पता नही चला। भरत पिछले तीन दिनों से लापता था, जिसकी तलाश में उसके परिजनों ने रामगंज थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।

इस हिंसा में भरत गायब हो गया और परेशान परिजन पिछले तीन दिन से उसे खोज रहे थे, बावजूद इसके परिजनों की लाचारी को देखते हुए भी पुलिस प्रशासन ने ये तक खबर नही दी कि भरत की मौत हो गई है और बात को छुपाए रखा। भरत का शव सवाई मानसिंह अस्पताल के मुर्दाघर में पड़ा हुआ था। जैसे ही मोेहम्मद रईस उर्फ आदिल मामले को लेकर प्रशासन और परिजनों के बीच सहमति बनी तो भरत के परिजनों को पता चला कि उसका इकलौता विकलांग बेटे का शव पिछले तीन दिन से मुर्दाघर में पड़ा हुआ है।
बस यह खबर मिलते ही मुर्दाघर पर कोहराम मच गया। हैरानी तो यह है कि विकलांग भरत कुमार अपनी 65 वर्षीय की बूढ़ी मां का इकलौता सहारा था। दो जून की रोटी का जुगाड़ करने के लिए विकलांग भरत दिन रात ई-रिक्शा चलाता था। लेकिन उसकी मौत के बाद अब बूढ़ी मां बेसहारा हो गई। रामगंज की हिंसा ने उसके इकलौते बेटे को हमेशा-हमेशा के लिए छीन लिया ।

भरत के चाचा तोलाराम के मुताबिक भरत को विकलांग सहायता के तहत ये ई-रिक्शा मिला था ताकि वह अपना और अपनी मां का भरण पोषण कर सके। ऐसे में भरत की मौत के बाद अब उसकी बूढी मां का जीवन यापन कैसे होगा यह एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है । भरत के चाचा तोलाराम ने भरत की मौत का जिम्मेदार इस पूरी हिंसा और पुलिस प्रशासन को करार दिया है।साथ ही उन्होंने ये आरोप लगाया है की पुलिस ने तीन दिन तक भरत की मौत की खबर छुपाए रखी। लिहाजा उन्होंने भी प्रशासन से मृतक आदिल के परिवार की तरह ही मुआवजा और न्याय की मांग की है।

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