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स्टूडेंट को डॉग ने काटा तो इंस्टीट्यूट ने कुत्तों के मुंह-पैर बांध मरने को छोड़ा

जयपुर। तस्वीर एमएनआईटी कैम्पस से आई है। जो शिक्षा के क्षेत्र में सर्वोच्च संस्थानों में गिना जाता है। एमएनआईटी कैंपस में दो डॉग्स मरे हुए पाए गए हैं। दोनों के मुंह, पैर बर्बरता से बंधे हुए हैं।

एमएनआईटी प्रशासन के खिलाफ जानवरों को जहर देकर मारने के मामलों में आईपीसी की धारा 428,429 व पीसीए एक्ट सेक्शन 11 के तहत मामले दर्ज कराए गए हैं। क्या हुआ था?
सबसे प्रतिष्ठित संस्थान, सबसे चौंकाने वाला फैसला और उससे भी बढ़कर सबसे बर्बर व्यवहार। घटना एमएनआईटी की है।

शनिवार को एमएनआईटी के एक स्टूडेंट को एक रेबिड डॉग ने काट लिया। इसके बाद तो एमएनआईटी प्रशासन बेजुबानों पर सख्ती करने पर उतर आया। एमएनआईटी के कैंपस में मौजूद डाॅग्स के मुंह, हाथ-पैर कंटीले तारों से बांधकर उन्हें मरने को छोड़ दिया गया। जिस स्टूडेंट को डॉग ने काटा था, वो अभी एसएमएस अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। आरोप है कि रेबिड डॉग को प्रशासन ने मरवा दिया है।

क्यों किया ऐसा?
इसके पीछे कोई स्पष्ट तर्क नहीं है। भास्कर रिपोर्टर ने जब कैंपस में मौजूद चश्मदीद गवाहों से इस बेरहमी के बारे में बात की, तो कैंपस में रहने वाले छठी क्लास के स्टूडेंट ने नाम न बताने की शर्त पर कहा- रविवार को एक कुत्ते को बोरी में बांध कर ट्रैक्टर के नीचे छोड़ दिया।

हम उन कुत्तों के साथ खेलते थे। उन्होंने कभी हम पर हमला नहीं किया और न ही कभी काटा। पता नहीं उन्होंने ऐसा क्यों किया? उधर एमएनआईटी के डायरेक्टर का कहना है- कैंपस में कुत्तों को जबरन पकड़ कर नहीं ले गए। ना ही उन्हें मारा गया है। संभवत: कुत्तों को रेबीज था, जिससे उनकी मौत हुई है।

कब मिली शिकायत?
बीते 3 दिनों से एमएनआईटी में घूमने वाले कुत्तों को पकड़ कर कैंपस से बाहर छोड़ने का ड्रामा शुरू हुआ। पास की बस्ती में रहने वाले लोकेश के अनुसार एक स्टूडेंट को जब कुत्ते ने काटा तो नगर निगम की गाड़ी आई थी।

वो कुछ कुत्तों को साथ पकड़ कर ले गए। वहीं स्टाफ ने कुछ कुत्तों को खुद मार दिया और जमीन में गाड़ दिया। स्टाफ क्वार्टर्स में रहने वाले 11वीं के मोहनीश ने बताया, दो दिन से 5 और कुत्ते मिसिंग हैं।

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