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आज से बंद होंगे मैकडॉनल्ड्स के 169 स्टोर्स, 7000 लोगों की नौकरी खतरे में

नई दिल्ली। मैकडॉनल्ड्स का कहना है कि कनॉट प्लाजा रेस्टोरेंट लिमिटेड (सीपीआरएल) उसका ब्रैंड नेम और ट्रेड मार्क इस्तेमाल करने के लिए छह सितंबर से अधिकृत नहीं रहेगा। उत्तर भारत में आज से लोगों को मैकडॉनल्ड्स का बर्गर खाने को नहीं मिलेगा।

जानकारी के लिए बता दें कि बख्शी के साथ स्थापित यह संयुक्त उपक्रम उत्तर और पश्चिम भारत में 169 मैकडॉनल्ड्स आउटलेट का संचालन करता है। आज से इसके बंद हो जाने के बाद से करीब 7000 लोगों की नौकरी खतरे में आ गई है।

इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक सीपीआरएल को 21 अगस्त को जारी किए गए टर्मिनेशन लेटर की तारीख 5 सितंबर को खत्म हो गई है। इसके चलते अब सीपीआरएल, मैकडॉनल्ड्स के लोगो, ट्रेडमार्क, डिजाइन व अन्य चीजों का उपयोग नहीं कर सकता।

इन आउटलेट्स के बंद हो जाने के बाद लोगों को उनकी पसंद का बर्गर और फ्रेंच फ्राइस खाने को नहीं मिल पाएंगी। इसके अलावा मैकडॉनल्ड्स का महाराजा बर्गर भी काफी पसंद किया जाता है।

NCLT ने मैकडॉनल्ड्स कॉर्प को शो-कॉज नोटिस जारी किया
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने मंगलवार को मैकडॉनल्ड्स की ओर से फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली विक्रम बख्शी की याचिका को खारिज कर दिया है। वहीं दूसरी ओर बख्शी की अवमानना याचिका पर ट्रिब्यूनल ने मैकडॉनल्ड्स कॉरपोरेशन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

क्या कहना है मैकडॉनल्ड्स का-
मैकडॉनल्ड्स ने बयान जारी किया है कि सीपीआरएल को जो नोटिस पीरियड दिया गया था वो आज यानी कि मंगलवार को खत्म हो गया है। साथ ही सीपीआरएल को अब संपत्ति इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। आपको बता दें कि इससे पहले मैकडॉनल्ड्स ने कहा था कि विक्रम बख्शी के साथ चल रहे विवाद को सुलझाना संभव नहीं है।

क्या है मामला?
अमेरिका की दिग्गज कंपनी मैकडॉनल्ड्स और कनॉट प्लाजा रेस्टोरेंट्स (सीआरपीएल) के बीच काफी समय से कानूनी लड़ाई चल रही है। अगस्त 2013 में सीपीआरएल के मैनेजिंग डायरेक्टर पद से विक्रम बख्शी को हटाने के बाद से ही बख्शी और मैकडॉनल्ड्स के बीच लड़ाई जारी है।

बख्शी ने इस विवाद को कोर्ट में चुनौती दी है। बख्शी की ओर से पैरवी करने वाले वकील एएस चंडोक, जिन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल ने आरोपों से इनकार किया ने बताया, “वो इसलिए हटाए गए क्योंकि मैकडॉनल्ड्स को लग रहा था कि बख्शी अनियमित वसूली गतिविधियों में शामिल थे, इसलिए कंपनी चाहती थी कि वो बाहर चले जाएं।”

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