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उपराष्ट्रपति वेंकैया का पहला दिन, राज्यसभा में पीएम मोदी ने की तारीफ

नई दिल्ली। वेंकैया नायडू देश के 13वें उपराष्ट्रपति बन गए हैं। राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई। नायडू ने अपनी शपथ हिंदी में ली। इस मौके पर पीएम मोदी के अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्री, सांसद और विपक्षी दलों के नेता मौजूद थे।

शपथ ग्रहण के तत्काल बाद नायडू राज्यसभा पहुंचे जहां उनका स्वागत किया गया और उन्होंने सभापति की कुर्सी संभाली। इसके बाद सदन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नायडू की तुकबंदी की तारीफ करते हुए शायराना अंदाज में कहा कि ‘अमल करो ऐसा सदन में, जहां से गुजरे तुम्हारी नजरें, उधर से तुम्हें सलाम आए’।

पीएम ने कहा कि नायडू किसान परिवार में जन्में हैं और खेत खलीहान को अच्छी तरह जानते हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना उन्हीं की देन है।

शपथ से पहले नायडू सुबह अपने घर से निकलकर सीधे राजघाट पहुंचे जहां उन्होंने महात्मा गांधी की समाधी पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वो डीडीयू पार्क पहुंचे जहां पं. दीनदयाल उपाध्याय को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इससे पहले गुरुवार को उन्होंने सदन ठप करने की प्रवृत्ति रोकने के लिए सख्ती बरतने के इरादे साफ कर दिए। उन्होंने कहा कि सदन चलाने के लिए वे नियमों को लागू करेंगे। नायडू ने निवर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का नाम लिए बिना देश के अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना के माहौल वाले बयान को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों की असुरक्षा का मुद्दा केवल राजनीतिक फायदे के लिए उठाया जा रहा है।

राष्ट्रपति भवन में नायडू को सुबह 10 बजे उपराष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई जाएगी। इसके बाद नायडू राष्ट्रपति भवन से सीधे संसद भवन पहुंचेंगे और सभापति के रूप में सुबह 11 बजे राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करेंगे। निर्वतमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल गुरुवार की मध्यरात्रि को खत्म हो गया।

सक्रिय राजनीतिज्ञ से संवैधानिक पद के अपने नए सफर की शुरुआत से ठीक पहले नायडू ने अंसारी का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना की बात कर रहे हैं। यह राजनीतिक प्रोपेगैंडा है। हकीकत यह है कि पूरे दुनिया की तुलना में भारत में अल्पसंख्यक सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं और उन्हें उनका हक मिलता है। नायडू ने कहा कि वास्तव में भारतीय समाज सबसे ज्यादा सहिष्णु है। सहिष्णुता की वजह से ही हमारा लोकतंत्र इतना सफल है।

नायडू ने एक समुदाय की बात करने जैसी प्रवृत्ति को गलत बताते हुए कहा कि इससे दूसरे समुदायों पर असर पड़ेगा। इसीलिए हमें सबकी बराबरी की बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का शीर्ष संवैधानिक पदों पर पहुंचने से साफ है कि भेदभाव जैसी कोई बात ही नहीं। गोरक्षा के नाम पर हुए हमलों के संदर्भ में नायडू ने कहा कि भारत इतना बड़ा देश है और ऐसे में इक्का-दुक्का मामले अपवाद हैं। कुछ लोग राजनीतिक वजहों से ऐसी घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी तूल देने से बाज नहीं आते।

 

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