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नोटबंदी से कालाधन रोकने में कितनी मदद मिली : स्थायी समिति

► अगस्त में गृह सचिव का कार्यभार संभालने जा रहे राजीव गाबा से कहा गया है कि वह दो सप्ताह के भीतर सरकार की ओर से लिखित प्रतिक्रिया दें
► क्रिप्टो करेंसी और बिटकॉइन की वैधता और साइबर अपराधियों द्वारा बैंक खातों से पैसे निकालने पर भी चिंता जता चुके हैं सांसद

एक संसदीय समिति ने गृह मंत्रालय से पूछा है कि नोटबंदी का काले धन के सृजन पर कितना असर पड़ा है, जिसका इस्तेमाल आतंकवादियों के वित्तपोषण के लिए किया जा रहा था। अगस्त में गृह सचिव का कार्यभार संभालने जा रहे राजीव गाबा से कहा गया है कि वह दो सप्ताह के भीतर सरकार की ओर से लिखित प्रतिक्रिया दें। सूत्रों के मुताबिक वित्त मामलों पर संसद की स्थायी समिति गृह मंत्रालय के अधिकारियों से नोटबंदी से काले धन पर रोकथाम पर पडऩे वाले असर के बारे में जानना चाहती है, जिन्होंने सांसदों को डिजिटल अर्थव्यवस्था के बारे में जानकारी दी थी।

यह मामला तब सामने आया जब सरकार ने विवादास्पद नोटबंदी का यह कहकर बचाव किया कि काले धन पर अंकुश लगाने के लिए यह जरूरी था, जिससे आतंकवादियों को वित्तपोषण में मदद की जाती है, साथ ही इससे सीमा पार आतंक को भी मदद मिलती है। सांसदों को जानकारी देते हुए गाबा ने कहा था कि फायरवाल्स, सॉफ्टवेयर व्यवस्था से डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित बनाया जा रहा है, जिस पर अ कई इंस्टीट्यूशंस अभी भी काम कर रहे हैं, जिससे वित्तीय क्षेत्र व बैंकिंग के आंकड़ों को साइबर हमलों से बचाया जा सके।

क्रिप्टो करेंसी और बिटकॉइन की वैधता का मसला भी कुछ विपक्षी सदस्योंं की ओर से उठाया गया, जैसा कि क्रेट-इन के गुलशन राय ने स्थायी समित को साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न तकनीकी मसलोंं की जानकारी दी थी। अधिकारियों ने कहा कि देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कुछ सदस्यों ने गुजरात की एक कंपनी द्वारा अखबार में हाल में दिए गए विज्ञापन का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि डिजिलट लेन देन का आकार बहुत कम 2 अरब रुपये है, जबकि पूरी दुनिया में डिजिटल लेनदेन 54 अरब रुपये का है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ महीने में डिजिटल लेनदेन बढ़कर 4 अरब रुपये यानी दोगुना हो जाएगा।

 

सुनवाई के दौरान साइबर अपराधों में आईपीसी की धाराओंकी व्यवहार्यता के मसले पर भी चर्चा हुई थी, जिसके बारे में अधिकारियों ने कहा कि टीके विश्वनाथन समिति आईटी अधिनियम पर पर विचार कर रही है और समिति अगले महीने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। कुछ सदस्यों ने इस बात को लेकर भी ङ्क्षचता जताई कि साइबर चोरी में बैंंक खातों में से पैसे गायब हो जा रहे हैं। और इसे रोकने का कोई तरीका नहीं है। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत, जो संसदीय समिति के समक्ष पेश नहीं हुए थे, से कहा गया है कि वे 20 जुलाई को आएं। सूत्रों ने कहा कि नैसकॉम के अधिकारी भी समिति के सदस्यों को डिजिटल अर्थव्यवस्था की सुरक्षा को लेकर जानकारी देंगे।

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