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जीएसटी : बाजारों में बिक्री का नोटबंदी से भी बुरा हाल

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की उच्च कर दरों, दरों में विसंगियों और कारोबारियों में भ्रम की स्थिति से थोक कारोबार ठप पड़ा है। दिल्ली मार्बल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप भारद्वाज के मुताबिक मार्बल पर 28 फीसदी जीएसटी के कारण यह महंगा हो गया है, जिससे ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं। दिल्ली के ज्यादातर कारोबारियों को इस समस्या से जूझना पड़ रहा है।

कश्मीरी गेट के वाहन कलपुर्जा कारोबारी और चैंबर ऑफ ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री के संयोजक बृजेश गोयल ने कहा कि वाहनों के पुर्जों पर कर 12.5 से बढ़कर 28 फीसदी हो गया है जिससे बड़े सौदे फिलहाल नहीं हो पा रहे हैं। वहीं खुदरा खरीदार 20 लाख रुपये से कम सालाना कारोबार वाले गैर पंजीकृत कारोबारी से सामान खरीदना पसंद कर रहे हैं। गोयल ने कहा कि बिक्री इतनी कम है जितनी नोटबंदी के दौरान भी नहीं थी।

कपड़ा कारोबारी व चांदनी चौक सर्वव्यापार मंडल के महासचिव संजय भार्गव कहते हैं कि नोटबंदी के दौरान छोटे-बड़े खरीदार कार्ड, चैक व अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान कर माल खरीद रहे थे। लेकिन जीएसटी के बाद थोक खरीदार लगभग नदारद हैं। खुदरा ग्राहक भी बहुत कम आ रहा है। मेटल ऐंड स्टेनलेस स्टील मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र शाह ने कहा कि जीएसटी की जानकारी न होने से कारोबारी डरे हुए हैं। धागा कारोबारी रमन गुप्ता कहते हैं कि पिछले 15 दिन से मुंबई, सूरत और अहमदाबाद सहित देश के प्रमुख कपड़ा बाजार बंद हैं।

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