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1 जुलाई से ही जीएसटी लागू, रिटर्न फाइल करने के नियमों में छूट

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए तकनीक संबंधी तैयारियां पूरी नहीं होने की आशंका के बावजूद जीएसटी परिषद ने 30 जून और 1 जुलाई की दरमियानी रात से ही नई कर प्रणाली लागू करने का फैसला किया है। लेकिन परिषद ने उद्योग को राहत देते हुए पहले दो महीनों में रिटर्न दाखिल करने के नियमों में थोड़ी छूट दी है। अलबत्ता कुछ राज्यों ने आशंका जताई कि नियमों में छूट से उन्हें राजस्व का नुकसान हो सकता है। जीएसटी परिषद की रविवार को हुई बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमारे पास जीएसटी का क्रियान्वयन टालने का समय नहीं है। आधिकारिक रूप से जीएसटी 30 जून और 1 जुलाई की दरमियानी रात से लागू हो जाएगा।’

परिषद ने जीएसटी के तहत लॉटरी के लिए दो दरें बनाई हैं। सरकार द्वारा संचालित लॉटरी और निजी कंपनियों की लॉटरी के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं। साथ ही होटल उद्योग के लिए कर की दरों में बदलाव किया गया है और कंपोजीशन स्कीम के लिए एक निगेटिव सूची बनाई गई है। परिषद ने हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कंपोजीशन स्कीम में निचली दर रखने का फैसला किया है। परिषद ने साथ ही ई-वे बिल के क्रियान्वयन को फिलहाल टालने का फैसला किया है और इसके लिए कुछ समय तक राज्यों की मौजूदा व्यवस्था ही चलेगी।
लेकिन कारोबारियों को जुलाई के लेनदेन के लिए 3बी फॉर्म 20 अगस्त तक और अगस्त के लेनदेन के लिए 20 सितंबर तक दाखिल करना होगा। यह कर बकाये और इनपुट क्रेडिट के उनके अपने आकलन पर आधारित होगा। सामान्य स्थितियों में जीएसटी व्यवस्था के तहत रिटर्न स्वत: तैयार हो जाएगा। अढिय़ा ने कहा कि बाद में दोनों रिटर्न मिलाए जाएंगे और अगर कोई अंतर आता है तो करदाता को उसका भुगतान करना होगा।

जेटली ने कहा, ‘इससे करदाताओं को रिटर्न फाइल करने का अभ्यास हो जाएगा और व्यवस्था पर कोई अनावश्यक भार नहीं होगा।’ हालांकि वित्त मंत्री ने साफ किया कि कुछ कारोबारियों और कंपनियों के अपनी तैयारियों को लेकर पुख्ता भरोसा नहीं हो पाने के चलते ऐसा किया जा रहा है। असम समेत कुछ राज्यों को यह आशंका है कि रिटर्न जमा करने की समयसीमा में छूट दिए जाने से उन्हें राजस्व का नुकसान उठाना पड़ सकता है। लेकिन अढिया का मानना है कि फॉर्म 3बी और उसके आधार पर टैक्स फाइलिंग से सरकार को राजस्व की हानि नहीं उठानी पड़ेगी। इन 2 महीनों में रिटर्न जमा करने पर कोई भी विलंब शुल्क और जुर्माना नहीं लगेगा। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, ‘करदाताओं को सुविधा देने और नई कर प्रणाली के अनुरूप ढलने के लिए वक्त देना ही इसका मकसद है।’ हालांकि जेटली ने कहा कि सितंबर से सभी प्रावधान पूरी सख्ती से लागू किए जाएंगे।

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