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वित्तीय संकट : सरकार की कमाई भी होगी कम,दूरसंचार भी बेदम

दूरसंचार उद्योग पर मंडरा रहे वित्तीय संकट का असर इस साल सरकार के राजस्व पर भी पड़ना लगभग तय है। दूरसंचार विभाग ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिए अनुमानित 47,305 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य को हासिल करने में असमर्थता जताई है। विभाग ने वित्त मंत्रालय से इसे घटाकर 29,524 करोड़ रुपये करने को कहा है, जो पहले के अनुमानित लक्ष्य से करीब 40 फीसदी कम है।

दूरसंचार विभाग ने इस बारे में वित्त मंत्रालय को एक पत्र लिखा है, जिसे बिज़नेस स्टैंडर्ड ने देखा है। विभाग का कहना है कि दूरसंचार क्षेत्र में जारी गंभीर वित्तीय संकट और सभी प्रमुख दूरसंचार कंपनियों के राजस्व में गिरावट देखते हुए 2017-18 के राजस्व लक्ष्यों में संशोधन की जरूरत है। विभाग ने चालू वित्त वर्ष के लिए 46,351 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य रखा था, जिसे वित्त मंत्रालय ने बढ़ाकर 47,305 करोड़ रुपये कर दिया था।
दूरसंचार उद्योग का कुल राजस्व वित्त वर्ष 2015-16 में 2.36 लाख करोड़ रुपये था, जो पिछले वित्त वर्ष में 26,000 करोड़ रुपये घटकर 2.10 लाख करोड़ रुपये रह गया। दूरसंचार विभाग का मानना है कि प्रमोशनल ऑफर और कम कॉल दरों के कारण राजस्व में गिरावट का यह दौर कुछ समय तक जारी रहेगा। कई कंपनियों ने वॉयस कॉल और डेटा का मिला-जुला पैकेज देना शुरू कर दिया है और उन्हीं की वजह से राजस्व को झटका लगा है। इसमें बाजार विश्लेषण का हवाला देकर कहा गया है कि कीमतों में जो कटौती की गई है, वह कुल डेटा रिचार्ज के 45 से 67 फीसदी है।

दूरसंचार कंपनियों पर पहले ही 4.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। माना जा रहा है कि पिछले साल सितंबर में आई रिलायंस जियो के कारण दूरसंचार कंपनियों की वित्तीय स्थिति और खराब हुई है। दूरसंचार उद्योग की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने एक अंतरमंत्रालय समिति का गठन किया है। इस समिति ने हाल ही में दूरसंचार कंपनियों की समस्याओं को समझने के लिए उनके प्रतिनिधियों और बैंकों के साथ बैठकें की थी। विभाग को आशंका है कि राजस्व में कमी के कारण कंपनियां अपने नेटवर्क विस्तार में निवेश से परहेज करेंगी। अनुमानों के मुताबिक दूरसंचार क्षेत्र को 2020 तक 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी।

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