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बस्सी: मौत बांटते यमदूतों पर कैसे लगे लगाम

बस्सी। ( संजय चंद्रवाल) जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोजाना ग्रामीण इलाकों से रोजगार की तलाश में आने वाले कहीं ओवरलोड वाहनों पर सफर करते हुए अंतिम यात्रा पर न पहुंच जाए यह भय सदा बना रहता है। क्योंकि रोजाना घर आने-जाने वाले हजारों लोग राजधानी के आसपास के इलाकों से अपनी रोजी-रोटी के लिए इन ओवरलोड वाहनों में यात्रा करने को मजबूर हैं। ग्रामीण रोजाना सुबह जल्दी उठकर थैले में मजदूरी का सामान रखकर गांव से जयपुर शहर में पहुंचता है। कोई मकान बनाता है तो कोई मकानों का रंग-रोगन करके घरों को चमकाता है। शाम को वह वापस घर सुरक्षित लौट पाएगा इसकी गारंटी नहीं, शहर में आने वाले ओवरलोड वाहनों पर कोई रोकथाम नहीं है।

ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले सवारी वाहन, जीप, बसें या अन्य कोई वाहन सभी ओवरलोड नजर आते हैं जो कभी भी किसी बड़ी अनहोनी का शिकार हो सकते हैं। इतना ही नहीं, ये ओवरलोड वाहन पुलिस थानों और चौकियों के  सामने से बेखौफ गुजरते हंै जिन्हें कोई रोकने, टोकने वाला नहीं होता। इसी सरकारी उदासीनता के चलते गंभीर सड़क हादसों में लोग अपनी जान गंवा रहे हंै। बसों में क्षमता से कई गुना अधिक सवारियां बिठाई जाती हैं।

इसके बाद भी कई सवारियों को फुटरेस और कई सवारियों को छत पर बिठाया जाता है। हर दिन औद्योगिक क्षेत्रों सहित अन्य कार्यों में लगे श्रमिक वाहनों से अप-डाउन करते हैं। इसके चलते सुबह-शाम के समय अधिकांश वाहन क्षमता से अधिक भरे होते हैं। बस संचालक तथा पुलिस की अनदेखी के चलते अवैध ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं।

मजबूरी यह भी

गांवों से शहर में पहुंचने वाले अधिकांश मजदूर होते हैं। समय पर पहुंचने के चक्कर में ये बसों की छत पर लटककर सफर करते हैं। ऐसे में वाहन में ठसाठस हालत में सवारियां भरी होने के बावजूद भी सफर करना मजबूरी बना हुआ है। इसके चलते सुबह के समय ग्रामीण इलाकों से संचालित होने वाले अधिकांश वाहन क्षमता से अधिक भरे होते हैं।

इन गांवों से रोज अप डाउन करते हैं ग्रामीण

बस्सी और दौसा के निकटतम क्षेत्र में लालगढ़, बांसखो, पाटन, तूंगा, माधोगढ़, सांभरिया, सोनड़, भूड़ला, लवाण, कल्लावास, देवरी, महादेवपुरा, गढ़ की कोठिया सहित आसपास के गांवों से ग्रामीण रोज अप-डाउन करते हंै।

यह है हकीकत

हकीकत जानने के लिए महानगर टीम जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर मीणा पालड़ी पहुंची। वहां पर माधोगढ़ निवासी राकेश बैरवा से बात की जो मकानों की दीवारों पर दिन भर रंग-रोगन का काम करता है। उसने कहा कि चाहे फुटरेस पर या बस की छत पर बैठ कर आना पड़े मजदूरी करने तो आना ही पड़ता है साहब, अगर मजदूरी नहीं करेंगे तो खाएंगे क्या। हकीकत यह है कि सवारियों से भरी ओवरलोड बसें 3 पुलिस थाना बस्सी, कानोता और ट्रांसपोर्ट नगर थानों से होकर गुजरती हैं। इसके बाद भी उचित कार्रवाई नहीं हो रही है। सोचने वाली बात है कि अगर कोई बड़ा हादसा हो जाता है तो इसका जिम्मेदार कौन…!

ओवरलोडिंग को लेकर हमारे यहां लगातार कार्रवाई की जा रही है और सभी नजर बनाए हैं लेकिन इसके बावजूद कोई नजर बचाकर निकल ही जाता है। इसके अलावा कल शाम ही एक बस जब्त की है।

-गौरी शंकर बोहरा

कानोता थाना प्रभारी

जिस बस के बारे में आप बात कर रहे हैं उसे कई बार जब्त किया जा चुका है। साथ ही, कई बार चालान भी काटे गए हैं। हम सिर्फ एमवी एक्ट के तहत कार्रवाई कर सकते हैं।

– वीरेन्द्र सिंह

बस्सी थाना प्रभारी

यह हमारी जानकारी में आया था जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस को सूचित कर दिया था और हमने भी चेक करवाया था। यदि आपके पास बस के नंबर हैं तो बता दें हम तत्काल ही कार्रवाई करवाते हैं।

-नरेश कुमार मीना

ट्रांसपोर्ट नगर थाना प्रभारी

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